आशवॉथामा कौन थे – अश्वत्थामा कहां है, रहस्य,वरदान

Ashwatthama kon thy 

अश्वत्थामा कौन थे

आशवॉथामा कौन थे - अश्वत्थामा कहां है

अश्वत्थामा अश्वत्थामा की कहानी महाभारत से जुड़ी हुई है, अश्वत्थामा एक महान योद्धा थे, यह गुरु द्रोणाचर्या के पुत्र थे. जो की सात चिरंजीवी मे से एक थे , इन्हे भगवान शिवा ने अमर होने का वरदान दिया था, इन्हे अपने वरदान पर बहुत अहंकार था, परंतु अहंकार तो किसी का नही टिकता , महाभारत युद्धा के समय इनका वरदान अभिशाप मे बदल गया जब श्री कृशन ने इन्हे अभिशाप दिया की तुम अमर तो रहोगे लेकिन तुम्हारी ज़िंदगी मे दुख और दर्द के अलावा कुछ नही होगा, तुम मौत के लिए रोज़ तड़पावगे. अब भगवान श्री कृष्णा ने उन्हे यह अभिशाप क्यो दिया, क्या कारण रहा, और यह भी बात आती है क्या वह अभी भी जीवित है या नही? अश्वत्थामा को जन्म से ही अमर होने का वरदान प्राप्त है, इन्हे वरदान के साथ साथ रत्न से नवाज़ा गया जो की इसके माथे पर है, इससे इन्हे कभी भी किसी मानव या किसी भी प्रकार का जीवन यापन करने के लिए परेशानी नही होगी.

अश्वत्थामा को कृष्णा जी ने अभिशाप क्यो दिया

इसका कारण यह है की जब अर्जुन और कौरवो ने द्रोणाचर्या के गुरुकुल मे दीक्षा लेने के लिए गये , तब अश्वत्थामा की दोस्ती कौरव के बड़े भाई दुर्योधन से हुआ जो की आने वेल समय मे हस्तिनापुर के राजा बनने वाले थे , और अश्वत्थामा शक्ति प्राप्ति करना चाहते थे, अब जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, अश्वत्थामा ने सबसे ज़्यादा लोगो को मार गिराया अर्जुन और करण के बाद, युद्धा के दौरान जब द्रोणाचार्य का देहांत हो जाता है तो अश्वत्थामा बदले के भाव मे आ जाते है ओर पांडव को मारना चाहते थे और रात को सोते समय उन्होने एक योद्धा समझकर उन्हे मारना चाहे. परन्तु नही हो पाया. युद्ध क्षेत्र मे जब लड़ाई फिर शुरू हुई तब उन्होने उत्तरा पर वॉर किया जो की गर्भाबती थी, तब श्री कृष्णा ने उन्हे श्राप दिया की तुम जीवित तो रहोगे परन्तु सबसे ग़रीबी मे ओर रोज़ मरने के लिए प्रार्थना करोगे.

Ashwatthama Ki Mani Ka Kya Rahasya Hai 

अश्वत्थामा एक बहुत शक्तिशाली योद्धा थे, जिन्हे शिवा के द्वारा वरदान दिया गया था अमर रहने का. उन्हे कोई भी नही मार सकता था भगवान स्वयं भी नही. उनके माथे पर एक रत्न था जो की उन्हे बलशाली बनाता था, उस पत्थर के होते हुए वो अनेक दीनो तक बिना खाए और पिए रह सकते है.उन्हे भूखे रहने की सिद्धि प्राप्त थी, वह एक वेदिक ब्राहमीन और शिवा के पुजारी थे.  उनका पत्थर उन्हे हॅश्ट पुष्ट और बिना थकान के ज़िंदगी जीने का वर देता था. जब श्री कृष्णा ने उन्हे श्राप दिया तो उस समय उनका यह पत्थर निकाल लिया गया था.

अश्वत्थामा बहुत गुस्से वाले थे, युद्ध के समय सभी मे दुर्योधन को समझाया की युद्ध ना करे इससे संसार का और तुम्हारा नाश हो सकता है, भीष्म पितामह ,अश्वत्थामा और भी लोगो ने समझाया की आपस मे जगह को बाट लो , परन्तु दुर्योधन ने किसी की नही सुनी.

Ashwatthama Ka Kya Rahasya Tha 

अश्वत्थामा भगवान का एक वरदान थे, जिन्हे अनेक ज्ञान प्राप्त था, अमर थे, जिन्हे एक पत्थर माथे पर जन्म से ही मिला जिसके साथ रहने से उन पर कभी भी ग़रीबी नही आएगी, और अनेक दीनो तक बिना खाए पिए जीवित रह सकते थे , इसकेअलावा पिता द्रोणाचर्या से दीक्षा प्राप्त की, और दुर्योधन से दोस्ती की एवं कुरुक्षेत्र मे साथ दिया. परन्तु पिता के अकारण देहांत ने उन्हे ग़लती करने पर मजबूर कर दिया , अहंकार मे आकर पाप कर दिया.

अश्वत्थामा कहां है

महाभारत युद्ध के अंतिम दिन उन्हें लगभग 3200 ईसा पूर्व शाप दिया गया था, वर्तमान कल्प के कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहने का अभिशाप।

माना जाता है की अश्वत्थामा मध्य प्रदेश के एक किले में रोंज सुबह भगवान शिव जी की पूजा करने आते हैं नर्मदा नदी की परिक्रमा करने वाले बहुत लोगों/संतों ने उन्हें शूल्पनेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में देखा है जो पूरे मध्य प्रदेश और गुजरात में फैला हुआ है।

Ashwatthama Ne Kya Kya Kia 

अश्वत्थामा एक वीर योद्धा थे, जो एक शक्तिशाली ओर एक कॉंमांडर थे, उनमे अमर होने का बहुत अहंकार था, महाभारत के युद्ध मे कुरुक्षेत्र मे अश्वत्थामा कौरवो के तरफ से लड़ रहे थे, यह बहुत ही कुशल योद्धा थे,दुशासना और करण के मरने के बाद , अश्वत्थामा ने दुर्योधन को समझाया की युद्ध यही रोक ले, परंतु वह नही माना, अश्वत्थामा ने युद्ध को एक नया मोड़ दिया समाप्ति की ले जाने के लिए.
अश्वत्थामा ने पांडव को मारना भी चाहा परन्तु नही मार पाए और युद्ध मे गर्भबती महिला पर वार करके श्री कृष्ण से श्राप का पात्र बने.

अश्वत्थामा ने रात मे सोते हुए पांडव को मरने का प्लान किया था, जब उन्होने दरवाज़ा तोड़ा तो धृष्टड्युंना जाग उठे, जो की पांडव के कॉंमांडर थे और अश्वत्थामा के पिता के मरने का कारण.

Kya Ashwatthama Abi Bhi Zinda Hai 

हिंदू पुराण के अनुसार अश्वत्थामा एक वीर योद्धा थे, जो की शिव जी के द्वारा वरदान प्राप्त थे, यह सात चिरांचीवीओ मे एक थे, और अमर थे, इन्हे कोई भी मार नही सकता था, यहा तक की स्वयं भगवान भी नही, कुरुक्षेत्र मे सबसे ज़्यादा वीरो को इन्ही ने मारा था, अनेक बार दुर्योधन को शांति का पाठ भी पढ़ाया, परन्तु कुछ काम ना आया अंत मे विनाश हुआ सभी का, कुरुक्षेत्रा मे अपनी ग़लती के कारण एक गर्भाबती महिला पर प्रहार करने के कारण श्री कृष्णा ने अभिशाप दिया की 3000 साल तक जंगलो मे ग़रीबी हालत मे भटकोगे, खाने पीने के तरस जाओगे और रोज़ मरने के लिए प्रार्थना करोगे. तथा मौत 3000 बाद ही तुम्हे आएगी. तो उनका जीवन काल सिर्फ़ 3000 तक का ही था , अभी सीधे शब्दो मे कहे तो वो अब नही है.

Ashwatthama Ko Amar Rehne Ka Vardan Kyu Mila 

अश्वत्थामा को अमर होने का वरदान कैसे मिला

गुरु द्रोण ने अनेक सालो तक भगवान शिव की तपस्या की उस तपस्या से खुश होकर शिव जी ने उन्हे दर्शन दिए और इच्छा बताने के कहा, तब द्रोण ने अश्वत्थामा को एक चीरजीवी के रूप मे माँगा. तब शिव जी ने उन्हे वरदान दिया की पुत्र चीरजीवी एवं अमर होगा और कभी किसी चीज़ की कमी नही आएगी जब तक की माथे पर वह पत्थर है. तो एसे यह है उनके वरदान का रहस्य. 

अश्वत्थामा को कोई भी हथियार नही मार सकता था, करण के जैसे उन्हे भी वरदान था , कारण को वरदान भगवान सूर्या से प्राप्ता था, उनके पास कवच था जिसके रहते कोई भी उन्हे नुकसान नही पहुचा सकता, परन्तु अहंकार विनाश का प्रथम रास्ता होता है, युद्धक्षेत्र मे कर्ण का भी अन्हकर टूट गया उसे भी कवच उतार कर देना पड़ा.

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