रुद्राक्ष पहनने से क्या होता है – उत्पत्ति, कथा, पौधा, नियम, फायदे नुकसान

आज इस पोस्ट में हम जानेंगे की रुद्राक्ष पहनने से क्या होता है और रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान साथ ही जानेंगे की रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते है और रुद्राक्ष धारण करने के नियम क्या है.

Rudraksh Pahnane Se Kya Hota Hai और रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान

साथ ही पोस्ट में जानेंगे की रुद्राक्ष माला पहनने से क्या होता है और रुद्राक्ष और भद्राक्ष में अंतर क्या है. इन सब के बारे में इस पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे.

Rudraksh Pahnane Se Kya Hota Hai

रुद्राक्ष धारण करने के औषधीय फायदे भी है तो कुछ धार्मिक फायदे भी होते है. रुद्राक्ष पहनने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है. रुद्राक्ष पहनने से दिल की बीमारी, रक्तचाप, हृदय रोग एवं अन्य समस्याओं में भी आराम मिलता है.

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर रुद्राक्ष को धारण  करने से भगवान शिव की कृपा भी प्राप्त होती है. इसे धारण करने से सारे काम सिद्ध होते है. धन, सुख, संपत्ति  की प्राप्ति होती है, और कई तरह के फायदे होते है.

Rudraksh Ki Katha

रुद्राक्ष को लेकर कई सारी पौराणिक कथाएं हैं जिनमें बताया गया है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी. रुद्राक्ष अर्थात रूद्र के अक्ष अर्थात भगवान शिव के आंसू.

एक बार भगवान शिवजी ने गहरी ध्यान साधना के बाद जब अपनी आँखे खोली तब उनकी आँखों से आंसुओ की कुछ बुँदे धरती पर कई जगह गिरी, और जहा-जहा पर भी ये आंसुओ की बुँदे गिरी, वही पर रुद्राक्ष के पेड़ उग गए.

वहीँ भागवत पुराण के अनुसार त्रिपुरासुर नामक एक राक्षस था, जिसे अपनी शक्तियों का बहुत घमंड था. उसने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं और ऋषि मुनियो को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. कोई उसका सामना नहीं कर पाया और सब परास्त हो  गए.

सभी देवता और ऋषि-मुनि डर के कारण भगवान शिव के पास जा पहुंचे और उनसे सहायता मांगने लगे. महादेव ने सभी देवताओं कि यह प्रार्थना सुन, अपने नेत्र ध्यान में लगाए और कुछ देर बाद जब आँखे खोली तो उनकी आँखों से आंसुओ की बुँदे धरती पर जा गिरी. धरती के जिन स्थानों पर ये आंसू गिरे वहा पर रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन हुए.

इसके बाद में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से त्रिपुरासुर का अंत कर धरती और देवलोक को त्रिपुरासुर के आतंक से मुक्त करवाया.

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे तब भोलेनाथ विचलित होकर उनके शरीर को लेकर तीनो लोको में विलाप करते हुए जा रहे थे. भगवान शिव के विलाप के कारण उनकी आँखों से आंसू निकले जो धरती के विभिन्न हिस्सों में जाकर गिरे.

माना जाता है भगवान शिव के इन्ही आंसुओ की वजह से रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्त्पत्ति हुई.

Rudraksh Ki Utpatti Kaise Hui

कुछ शास्त्रों के अनुसार देवी सती के वियोग में भगवान शिव अत्यंत दुखी थे और उनकी आंखों से आंसू निकलने लगे थे. ये आंसू धरती पर कई जगह गिरे. कहते है जिन-जिन जगहों पर ये आंसू गिरे थे उन्ही स्थानों पर रुद्राक्ष के पौधो का जन्म हुआ और उन्ही से रुद्राक्ष की उत्त्पति हुई.

Rudraksh Ka Paudha

रुद्राक्ष का पौधा दूसरे के पौधों की तरह होता है. यह आकार में 50 फ़ीट से लेकर 200 फ़ीट तक बड़े हो सकते है. इसके पत्तो का आकार भी थोड़ा लम्बा होता है. इसके पेड़ पर सफ़ेद कलर के फूल भी लगते है.

इस पर रुद्राक्ष का फल भी लगता है जो आकार में गोल होता है. जब यह फल पक जाता है तब यह खुद से ही गिर जाता है. इसके फल में से निकलने वाली गुठली रुद्राक्ष होती है.

Rudraksh Kaise Banta Hai

रुद्राक्ष एक पेड़ का फल होता है. जब यह पक जाता है तब नीले रंग का हो जाता है और पकने के बाद यह खुद गिर जाता है. इसे ब्लूबेरी बीड्स भी कहते है. रुद्राक्ष के फल के अंदर से निकलने वाली गुठली ही रुद्राक्ष होती है. यह बीज विभिन्न प्रकार के पेड़ो की प्रजातियों से मिलकर तैयार किये जाते है.

Rudraksh Ka Mahatva

रुद्राक्ष को धारण कर ने वाला भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है.  रुद्राक्ष धारण करने वाले पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उन पर आने वाली समस्याएं स्वतः ही दूर जाती है.

जो भी मनुष्य रुद्राक्ष को धारण कर लेता है वह दीर्घायु हो जाता है. इसे धारण करने वाले मनुष्य के जीवन में किसी प्रकार का  अभाव नहीं रहता, उसे धन-दौलत और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.

इसे धारण करने से मन शांत रहता है. सभी तरह के मानसिक और शारीरिक रोग दूर होने लगते है. इसे धारण करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती है.

Rudraksh Ke Mantra

रुद्राक्ष 14 तरह के होते है और उन्हें धारण करने के लिए भी अलग-अलग मंत्र होते है:

  • 1 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं नमः
  • 2 मुखी रुद्राक्ष : ॐ नमः
  • 3 मुखी रुद्राक्ष : ॐ क्लीं नमः
  • 4 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं नमः
  • 5 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं क्लीं नमः
  • 6 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं ह्रुं नमः
  • 7 मुखी रुद्राक्ष : ॐ हुं नमः
  • 8 मुखी रुद्राक्ष : ॐ हुं नमः
  • 9 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं ह्रुं नमः
  • 10 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं नमः
  • 11 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं ह्रुं नमः
  • 12 मुखी रुद्राक्ष : ॐ क्रौं क्षौं रौं नमः
  • 13 मुखी रुद्राक्ष : ॐ ह्रीं नमः
  • 14 मुखी रुद्राक्ष : ॐ नमः

Rudraksh Kitne Prakar Ke Hote Hain

कुल 14  प्रकार के रुद्राक्ष बताये गए है:

  • 1 मुखी रुद्राक्ष : एकमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव का साक्षात स्वरुप माना जाता है. इसे धारण करने वाले को सभी प्रकार के सुख-सुविधा मिलती है. धन, मान-सम्मान की प्राप्ति होती है. सिंह राशि वालो के लिए यह अत्यंत शुभ माना जाता है.
  • 2 मुखी रुद्राक्ष :  इस रुद्राक्ष को भगवान शिव  का अर्धनारीश्वर भी माना जाता है. इसे धारण करने से चित्त की एकाग्रता बढ़ती है और दाम्पत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. यह कर्क राशि वाले लोगो के लिए उत्तम होता है.
  • 3 मुखी रुद्राक्ष : इस रुद्राक्ष को त्रिमूर्ति की शक्तियों से सम्पन्न माना जाता है. यह अग्नि और तेज का स्वरुप माना जाता है. इसे धारण करने  ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है. जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते है उनके लिए लाभदायी होता है. मेष और वृश्चिक राशि के लिए उपयोगी होता है.
  • 4 मुखी रुद्राक्ष : चारमुखी रुद्राक्ष को ब्रह्मा जी का स्वरुप माना जाता है. यह धर्म-अधर्म, काम से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए होता है. यह मिथुन और कन्या राशि वालो के लिए सर्वोत्तम माना जाता है.
  • 5 मुखी रुद्राक्ष : पंचमुखी रुद्राक्ष  को साधना सिद्धि और इसकी सफलता की प्राप्ति दिलवाने वाला माना जाता है. इसे भगवान रूद्र का स्वरुप  माना जाता है. धनु और मीन राशि के वे लोग जिनको शिक्षा में बाधा उत्पन्न होती है उनके लिए यह लाभदायक होता है.
  • 6 मुखी रुद्राक्ष :  इसे धारण करने से शक्ति और बल की प्राप्ति होती है. स्त्रियों के लिए भी यह रुद्राक्ष उत्तम होता है. इसे भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना जाता है. तुला और वृष राशि के लिए शुभ होता है.
  • 7 मुखी रुद्राक्ष : सातमुखी रुद्राक्ष को सप्तऋषियों का प्रतिक भी माना जाता है. इसे पहनने से धन, संपत्ति, कीर्ति और वैभव की प्राप्ति होती है. सभी कार्य सिद्ध होते है. मकर या कुम्भ राशि वालो को मृत्यु समान कष्टों से बचाता है.
  • 8 मुखी रुद्राक्ष : अष्टमुखी रुद्राक्ष को अष्टभुजा वाली देवी और भगवान गणेश का प्रतिक माना जाता है. इसे धारण करने से अष्टसिद्धियों की प्राप्ति होती है. राहु से सम्बंधित समस्याओं के निवारण में यह बहुत ही फायदेमंद होती है.
  • 9 मुखी रुद्राक्ष : नौमुखी रुद्राक्ष नवदुर्गा एवं नवग्रह का स्वरुप माना जाता है. इसे धारण करने से सभी प्रकार के कामो में सफलता मिलती है. इसे धारण करना अत्यंत फलदायक और सुखदायक माना जाता है.
  • 10 मुखी रुद्राक्ष :  इसे भगवान् विष्णु का स्वरुप माना गया है. इसे धारण करने से सभी प्रकार के विघ्न और बाधाएं दूर होती है. इससे लौकिक और परलौकिक सुखो की प्राप्ति होती  है.
  • 11 मुखी रुद्राक्ष :  इसे शिव और शक्ति का स्वरुप माना जाता है. इसे धारण करने से शिव और शक्ति की सयुंक्त कृपा होती है. दुःख, दरिद्रता भी दूर होती है.
  • 12 मुखी रुद्राक्ष : इसे धारण करने से सभी प्रकार की सुख-सुविधा की प्राप्ति होती है.
  • 13 मुखी रुद्राक्ष : इसे पहनने से शुभ और लाभ दोनों की प्राप्ति होती है.
  • 14 मुखी रुद्राक्ष : सभी प्रकार के कष्टों और पापो का नाश होता है.
Rudraksh Dharan Karne Ke Niyam

रुद्राक्ष धारण करने के नियम निम्नलिखित है:

  • कभी भी किसी दूसरे इंसान का पहना हुआ रुद्राक्ष किसी दूसरे इंसान को नहीं देना चाहिए
  • रुद्राक्ष को गंदे हाथों से कभी ना छुए. नहाने के बाद ही इसे धारण करना चाहिए
  • रुद्राक्ष धारण करने वाले लोग तामसिक और मांसहारी  भोजन का सेवन ना करे.
  • रुद्राक्ष को हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में ही धारण करना चाहिए
  • रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे शिव जी के चरणों में रख कर मंत्र जाप के बाद ही इसे धारण करना चाहिए
  • रुद्राक्ष को कलाई, गले और हृदय तक ही धारण करना चाहिए, गले तक इसे धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है.
  • कलाई पर 12, गले में 36 और हृदय तक 108 रुद्राक्ष धारण करना चाहिए
  • सावन में, सोमवार के दिन और महाशिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष को धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है.
Rudraksh Dharan Karne Ki Vidhi

रुद्राक्ष धारण करने की विधि कुछ इस प्रकार है:

  • सबसे रुद्राक्ष को 5 से 7 दिनों के लिए सरसों के तेल में भिगोकर रखना चाहिए.
  • इसके बाद रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध, पंचामृत, पंचगव्य आदि जैसी पवित्र वस्तुओं से स्नान करवाना चाहिए.
  • अब स्नान करवाने के साथ-साथ “ॐ नमः शिवाय” का जाप भी करना चाहिए.
  • अब शुद्ध करने के बाद इसे चन्दन, बिल्वपत्र, पुष्प आदि अर्पित कर दीप के साथ पूजन करना चाहिए.
  • रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर उस पर हवन की भभूति लगाए.
  • अब पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके “ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात” मंत्र जाप से अभिमंत्रित करते हुए इस रुद्राक्ष को धारण करे.

रुद्राक्ष पहनने के बाद के नियम

रुद्राक्ष पहनने के बाद के नियम निम्न है:

  • मदिरापान करने वाले लोग इसे धारण ना करें या फिर इसे धारण करने के बाद शराब नहीं पीना चाहिए.
  • तामसिक और मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • जब भी आप सोने वाले होते है तब भी रुद्राक्ष को उतार कर सोना चाहिए, सोते हुए इसे धारण नहीं करना चाहिए.
  • जहां कहीं भी बच्चे का जन्म हुआ हो, वहां पर भी रुद्राक्ष को पहनकर नहीं जाना चाहिए.
  • किसी शवयात्रा में जाने पर भी इसे धारण ना करे, बल्कि इसे उतार कर ही जाए.
  • संभोग, मासिक धर्म आदि मानवीय क्रियाओ के दौरान भी रुद्राक्ष को धारण नहीं करना चाहिए.

रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान

रुद्राक्ष पहनने के फायदे:

  • मानसिक तनाव कम होता है.
  • दिल से सम्बंधित बिमारियों का खतरा कम हो जाता है.
  • वैवाहिक और दांपत्य जीवन सुखमय रहता है.
  • इसे धारण करने से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है.
  • घर में सुख शांति का माहौल रहता है.

रुद्राक्ष पहनने के नुकसान:

अगर इसे नियम पूर्वक ना पहना जाए तो इसके कुछ नुक्सान भी हो सकते है

  • बिना पूजन और नियम के रुद्राक्ष को धारण करने से मन अस्थिर हो जाता है.
  • रुद्राक्ष पहन कर शराब एवं मांस आदि खाने से भी हमारे शरीर पर इसका बुरा असर पड़ सकता है.
Rudraksh Aur Bhadraksh Me Antar

रुद्राक्ष और भद्राक्ष में कुछ अंतर होते है जिनकी मदद से आप इन्हे पहचान सकते है:

  • रुद्राक्ष के फल में पहले से ही मतलब प्राकृतिक रूप से छेद होता है जबकि भद्राक्ष में छेड़ करके उसे रुद्राक्ष जैसा दिखाया जाता है.
  • रुद्राक्ष को सरसो के तेल में डुबाने पर वह अपना रंग नहीं छोड़ता, जबकि भद्राक्ष रंग छोड़ देता है.
  • रुद्राक्ष को पानी में डुबाने पर वह डूब जाता है जबकि भद्राक्ष तैरता रहता है.
  • रुद्राक्ष को किसी नकली चीज से कुरेदने पर उसमे से रेशे निकलते है जबकि भद्राक्ष में ऐसा नहीं होता है.
किस राशि वालों को कौन सा रुद्राक्ष पहनना चाहिए
  • मेष– 3 मुखी रुद्राक्ष
  • वृष– छःमुखी और दसमुखी रुद्राक्ष
  • मिथुन– 4 मुखी और ग्यारहमुखी रुद्राक्ष
  • कर्क– 4 मुखी रुद्राक्ष
  • सिंह– पंचमुखी रुद्राक्ष
  • कन्या– गौरीशंकर रुद्राक्ष (यह प्राकृतिक रूप से ही जुड़े हुए होते है )
  • तुला– 7 मुखी रुद्राक्ष
  • वृश्चिक– आठ मुखी और 13 मुखी रुद्राक्ष
  • धनु– नौमुखी और एकमुखी रुद्राक्ष
  • मकर– 10 मुखी और 13 मुखी रुद्राक्ष
  • कुंभ– 7 मुखी रुद्राक्ष
  • मीन– एकमुखी रुद्राक्ष

रुद्राक्ष पहनने के बाद क्या नहीं करना चाहिए

रुद्राक्ष पहनने के बाद तामसिक और मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए, अपने मन को साफ़ सुथरा रखना चाहिए, किसी को भी गलत शब्द नहीं कहना चाहिए और ना ही उसका अपमान करना चाहिए, शराब नहीं पीना चाहिए, रुद्राक्ष पहन कर सम्भोग भी नहीं करना चाहिए.

Rudraksh – FAQs
रुद्राक्ष किस धागे में पहने

रुद्राक्ष को हमेशा पीले और लाल रंग के धागे में ही धारण करना चाहिए तभी इसका फायदा होता है. कभी भी इसे काले धागे में नहीं पहनना चाहिए.

रुद्राक्ष किसे पहनना चाहिए

रुद्राक्ष कोई भी व्यक्ति धारण  कर सकता है, वो चाहे पुरुष हो या स्त्री. रुद्राक्ष को धारण करते वक़्त कुछ बातो का ध्यान रखना भी  जरुरी होता है.

रुद्राक्ष घर में रखने से क्या होता है

रुद्राक्ष घर में रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती है, कोई कलह नहीं होती और घर की शांति भी बनी रहती है. घर में प्रेम और शिष्टाचार भी बना रहता है.

Rudraksh Kahan Se Khariden

रुद्राक्ष को आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीको से खरीद सकते है.

Rudraksh Ke Bare Mein Jankari

इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको रुद्राक्ष से जुडी सारी जानकारियां देने की कोशिश की है. अगर आपको कुछ और जानकारियां चाहिए तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते है.

सबसे अच्छा रुद्राक्ष कौन सा होता है

राशि और गुणों के हिसाब से हर इंसान के लिए अलग-अलग रुद्राक्ष अच्छा हो सकता है.

Rudraksh Se Kya Hota Hai

रुद्राक्ष बहुत ही पवित्र माना जाता है. यह भगवान् शिव के आंसुओ से बना होता है. रुद्राक्ष को धारण करने वाला मनुष्य भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है. रुद्राक्ष धारण करने से मन शांत होता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है.

Sapne Me Rudraksh Ki Mala Dekhna

सपने में रुद्राक्ष का दिखाई देना एक शुभ संकेत होता है, जिसका मतलब होता है की भगवान शिव की कृपा आप पर होने वाली है. आपका ध्यान भक्ति में लगने वाला है. आपके सारे काम पुरे होने वाले है.

उम्मीद करते है आपको हमारी यह पोस्ट Rudraksh Pahnane Se Kya Hota Hai और रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान पसंद आई होगी.

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