पारा खाने से क्या होता है – लक्षण, रोग, उपचार, मृत्यु, विधि, फायदे और नुकसान

इस Article की मदद से हम जानेंगे की Para Khane Se Kya Hota Hai और पारा खाने के लक्षण की पूरी जानकारी इस पोस्ट में विस्तार से जानेंगे. साथ ही इस पोस्ट की मदद से हम यह पता लगायेंगे की पारा कहाँ पाया जाता है और पारा कैसे बनता है. इस Article में ये भी बताया है की पारा खाने के बाद क्या उपचार किया जा सकता है.

Para Khane Se Kya Hota Hai और पारा खाने के लक्षण

इन सभी बातों को और भी विस्तार से जानने के लिए चलिए शुरू करते है Para Khane Se Kya Hota Hai पढने से….

Para Khane Se Kya Hota Hai

पारा खाने से क्या होता है

पारा खाने से इन्सानों पर लंबे समय में असर जहरीला असर होता है. अन्य जीवों पर भी इसका जहरीला असर होता है. इसलिए पर्यावरण में पारे की मौजूदगी एक गंभीर समस्या है. पर्यावरण में हर एक साल आने वाली पारे की आधी मात्रा ज्वालामुखी फटने से और अन्य भूगर्भीय प्रक्रियाओं से आती है.

लेकिन बची हुई आधी मात्रा के लिए इसका जिम्मेदार इन्सान हैं.वर्तमान समय में कलाकारों ने पारे का इस्तेमाल तस्वीरें बनाने के लिए करते है लेकिन नवपाषाण काल से पारे के लाल, सिंदूरी अयस्क का इस्तेमाल रंगने के काम में लाया जा रहा है. इसे तुर्की में स्थित गुफाओं की दीवारों पर बने विशाल जंगली जानवरों की तस्वीरों में देखा जा सकता है जो जानवर अब लुप्त हो चुके है.

थर्मामीटर का पारा मृत्यु हो सकती है

पारा एक बहुत ही खुबसूरत चीज़ है लेकिन इससे जान जाने का खतरा भी बहोत बना रहता है क्यों की यह एक गैर जिम्मेदार तत्वों में से एक है. पारा एक बहुत ही नजूक वस्तु है जिसे बीते समय में ऐसा माना जाता था की पारे से ही अन्य धातुओं का निर्माण हुआ है

. पारे पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए अब एक अंतरराष्ट्रीय संधी भी सक्रिय हो चुकी है. पारा एक ऐसा तरल प्रदार्थ है जो आसानी से अपनी अवस्था में आजाता है यही कारण है की इसे इतना ज्यादा पसंद किया जाता है.

पारा कहां मिलता है

पारा पृथ्वी पर बहुत कम जगह पर ही पाया है भारत में सिर्फ नेपाल में यह मिलता है इसके अलवा यह चीन, जापान और स्पेन से यहाँ आता है यह एक तरल प्रदार्थ के रूप में पाया है और यह बहुत भरी होता है.

पारा -38.87 डिग्री सेल्सियस पर तरल से ठोस अवस्था में बदल जाता है और ठोस अवस्था में पारे घनत्व 13.53 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर से बढ़ कर 14.18 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर हो जाता है. ठोस अवस्था में पारे का आयतन लगभग 3.59 % कम हो जाता है.

पारा कैसे बनता है

हर एक साल आने वाली पारे की आधी मात्रा ज्वालामुखी फटने से और अन्य भूगर्भीय प्रक्रियाओं से आती है. पारा एक प्रकार की धातु है जो की चाँदी के समान चमकदार होती है यह सामान्य तरल अवस्था में पाया जाता है जिसका सायनिक सिम्बल Hg होता है.

साथ ही पारे का परमाणु भार 200.59 amu होता है, और घनत्व 13.53 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है. जिसकी वजह से पारे का उपयोग थर्मामीटर, बैरोमीटर, मैनोमीटर तथा अन्य मापक उपकरणों में किया जाता है. पारद का उपयोग अनेक लपों तथा विसर्जन नली के रूप में भी होता है.

पारा खाने के लक्षण

पाने खाने की वजह से आपको सांस लेने में तकलीफ, याददाश्त में कमी, सिरदर्द जैसी बीमारियाँ होने लगती है. पाने खाने से पेशाब में जलन और गुर्दे की विफलता सहित कई और जान लेवा बीमारियाँ होने लगती है.

पारा खाने पर उपचार

पारा खाने के बाद किसका कोई उपचार नही है इसलिए अच्छा यही है की जितना हो सके उतना पारे के संपर्क में आने से बचें क्यों की यह एक विष के सामान कार्य करता है. यदि कोई व्यक्ति पारा खा लेता है तो यह उसके शरीर में विष के समान कार्य करता है और लकवा जैसे लक्षण सामने आने लगते है.

पारा मारने की विधि

पारा मारने की विधि जिसे हमारे पास मध्कालीन घातक खुराक 50 कहा जाता है. यह एक प्रकार के विष की मात्रा है जो की आबादी के आधे लोगों को मारने के लिए पर्याप्त होती है.

पारा से होने वाले रोग

पारा एक प्रकार का जहरीला प्रदार्थ है जिसके सेवन से इंसान की मौत भबी हो सकती है. यदि कोई व्यक्ति पारा खा लेता है तो उसको कई साड़ी बीमारियों का सामना भी करना पढ़ सकता है जैसे की याददाश्त का जाना, त्वचा व ह्रदय सम्बन्धी रोग या और भी कई घातक बीमारियाँ उसे हो सकती है.

हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबित वैज्ञानिको का यह मानना है की एक सामान्य थर्मामीटर के अन्दर केवल 1 ग्राम पारा पाया जाता है लेकिन सिर्फ उतना ही पारा लगभग 20 एकड़ में फैले जल को भी दूषित कर सकता है और इससे उनमे रहने वाली मछलियों का खान भी असुरक्षित हो जाता है

पारा प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाला द्रव्य है जो ज्वालामुखी के फटने से तथा उससे संबंधित कई प्रकार की ओद्योगिक प्रक्रिया के माध्यम से उत्पन्न होता है. भारत में पारा से प्रदूषित होने वाले कोई ज्यादा राज्य नही है केवल महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा तथा ओडिशा जैसे कुछ राज्यों के जल में समस्या उत्पन्न करता है.

Para Khane Se Kya Nuksan Hota Hai

पारा खाने से क्या नुक्सान होता है

‌‌‌पारे खाने से आपको दीर्घकालिक neurological क्षति का सामना करना पड़ सकता हैऔर खासकर इसका असर उन बच्चों पर ज्यादा होता है जो अभी विकसित हो रहे हैं. जर्नल ऑफ Preventive Medicine and Public Health के एक अध्ययन में कहा गया है कि जब पारा से किसी जीव को नुकसान पहुचता है उसी वजह से कई ऐसे लोग भी सामने आएं है.

पारा खाने से क्या फायदा

सालो से पारे का उपयोग दवाई में भी किया जाता आरहा है. यहाँ तक कि हाल तक पारा antiseptic, अवसादरोधक दवाईयों में भी प्रयोग में लाया जाता रहा है. बुखार होने की स्तिथि में शरीर का तापमान नापने के लिए भी पारे वाले थर्मामीटर की जरूरत पड़ती रही है. और अब दाँतों की भराई में भी पारा इस्तमाल लिया जाने लगा है.

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